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केंदा स्कूल में पढ़ाई ठप, जिम्मेदार कौन? बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ शिक्षक समय पर नहीं पहुंच रहे स्कूल

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर :  जिले के कोटा विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला केंदा में शिक्षकों की मनमानी इस कदर बढ़ चुकी है कि विद्यालय का समय और अनुशासन पूरी तरह मज़ाक बनकर रह गया है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार शनिवार को विद्यालय सुबह 8:00 बजे खुलना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि स्कूल के ताले तो खुल जाते है पर महाशय शिक्षक लोग 9:00 बजे के बाद भी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे। इस दौरान छोटे-छोटे मासूम बच्चे बिना किसी शिक्षक के, बिना निगरानी और मार्गदर्शक के प्रार्थना करते नज़र आते हैं। सबसे चिंताजनक और चौंकाने वाली बात यह है कि विद्यालय में चार शिक्षक पदस्थ होने के बावजूद,भी बच्चों का कहना है कि अक्सर एक भी शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचता। जब शिक्षक ही अनुपस्थित रहेंगे, तो पढ़ाई कैसे होगी? ऐसे में बच्चों का भविष्य आखिर किसके भरोसे छोड़ा गया है? यह स्थिति केवल शिक्षकों की लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की कार्य पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या समय पर निरीक्षण नहीं हो रहे हैं, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं? यदि नियमित निरीक्षण और सख्त निगरानी होती, तो क्या यह लापरवाही रोज़मर्रा की आदत बन पाती? शिक्षा जैसे संवेदनशील और जिम्मेदारी भरे क्षेत्र में इस तरह की उदासीनता अक्षम्य अपराध है। जवाबदेही तय होनी चाहिए न केवल लापरवाह शिक्षकों की, बल्कि उन अधिकारियों की भी जो व्यवस्था को सिर्फ कागज़ों में चलाने तक सीमित रखे हुए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन प्रशासन ऐसे लापरवाह शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा? या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा, और कीमत एक बार फिर बच्चों का भविष्य चुकाएगा?

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